Popular Posts

Tuesday, October 25, 2011

उफनता-तूफ़ान




आज दिल के समंदर मे, खुल के तूफ़ान आया है |
रोक सको तो रोक लो |



आज इन बहती फिजाओं मे भी एक जोश आया है |
रोक सको तो रोक लो|

आज इन घूमते-मंडराते बादलों से भी एक संवाद आया है |
सोच सको तो सोच लो | 
 
धर्म कि आड़ मे कब तक , नफरत हिंसा फैलाओगे |
उफनते-तपते गुस्से से आज बच सको तो बच लो |

मेरे मुल्क कि वादियों को कब तक जलाओगे ,
खामोशी मे भी एक जवाब आया है |
वक़्त है  , सोच लो और भाग सको तो भाग लो , .नहीं तो ख़ाक मे मिल जाओगे ||

No comments:

Post a Comment