
मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है |
थोड़ा सोचा , फिर बोला ;
खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या !
मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा |
उसने बिना सोचे बोला ,
तूफ़ान के बाद बर्बादी देखे हो क्या !
तो मैंने पूछा , बर्बादी से क्या मिलेगा |
उसने हँसकर बोला ,
जापान-जर्मनी देखे हो क्या !
अब पलटकर उसने पूछा ,
कभी भूखे बच्चे को रोते देखे हो |
कभी शेर-सवार गदहे को देखे हो |
मै सोचा , बहुत सोचा , फिर बोला ;
शायद , यही तो यहाँ होता है |
मैंने पूछा लोकतंत्र क्या है ???
उसने गंभीर होके बोला ,
कभी सियारों कि हुँकार और गदहों कि दहाड़ सुनी है क्या !!


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