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Tuesday, October 25, 2011

क्रांति







मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है |
थोड़ा सोचा , फिर बोला ;
खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या !

मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा |
उसने बिना सोचे बोला ,
तूफ़ान के बाद बर्बादी देखे हो क्या !

तो मैंने पूछा , बर्बादी से क्या मिलेगा |
उसने हँसकर बोला ,
जापान-जर्मनी देखे हो क्या !


अब पलटकर उसने पूछा ,
कभी भूखे बच्चे को रोते देखे हो |
कभी शेर-सवार गदहे को देखे हो |
कभी रंगे सियार को माला जपते देखे हो |
मै सोचा , बहुत सोचा  , फिर बोला  ;  
शायद  , यही तो यहाँ होता है |




मैंने पूछा लोकतंत्र क्या है ???
उसने गंभीर होके बोला ,
कभी सियारों कि हुँकार  और  गदहों कि दहाड़ सुनी है क्या !!


................................................SRT…………………………………………………………………………………………………………………

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