my poetry
Popular Posts
-
आज दिल के समंदर मे, खुल के तूफ़ान आया है | रोक सको तो रोक लो | आज इन बह ती फिजाओं मे भी एक जोश आया है | रोक सको तो रोक लो| आज इन घूम...
-
गहरी चिंता मे , मै बैठा हूँ | असमंजस मे , मै बैठा हूँ | क्या करूँ , ये समझ न आये | हाथ धरे , मै बैठा ...
-
मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है | थोड़ा सोचा , फिर बोला ; खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या ! मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा | उसने बिना ...
-
समझ न सकोगी , कभी तुम मुझे | मुझे इसकी परवाह थी भी नहीं | पर आस एक जरूर थी ; रोवोगी , दिल से मई...
-
जब सारी दुनिया सोती है , हम चैन से देखो जगते हैं | जब बारिष होती रहती है , हम उसमे भी ...
-
o god please help me, show me right path. where the light is present -- ...
-
DURING CHILD , I AM CRY, MY MOTHER GIVES ME SKY .. DURING TEEN , I AM SHY, ...
-
my poetry: भारतीय-सेना को समर्पित (Dedicated to indian army--... : जब सारी दुनिया सोती है , हम चैन से देखो जगते हैं...
-
my poetry: उफनता-तूफ़ान : आज दिल के समंदर मे, खुल के तूफ़ान आया है | रोक सको तो रोक लो | आज इन बह ती फिजाओं मे भी एक जोश आया है | रोक सको त...
-
my poetry: A journey of LIFE : " DURING CHILD , I AM CRY, ..."
Wednesday, November 2, 2011
my poetry: गहरी-चिंता
my poetry: गहरी-चिंता: गहरी चिंता मे , मै बैठा हूँ | असमंजस मे , मै बैठा हूँ | क्या करूँ , ये समझ न आये | हाथ धरे , मै बैठा ...
Tuesday, November 1, 2011
गहरी-चिंता
गहरी चिंता मे , मै बैठा हूँ |
असमंजस मे , मै बैठा हूँ |
क्या करूँ , ये समझ न आये |
हाथ धरे , मै बैठा हूँ ||
दिल कि सुनूँ , या दिमाग कि |
ख्यालों मे बस बैठा हूँ |
रात को नींद , न दिन को चैन |
जलती आग सी धूप मे , मै बैठा हूँ |
हँसता था ; मै भी कभी |
अपनी ही धुन मे , खोया रहता था |
आज मायूस सा, मै बैठा हूँ |
भविष्य चिंता मे बैठा हूँ |
गहरी चिंता मे बैठा हूँ ,हाथ धरे मै बैठा हूँ |
आज दिल से आवाज निकली ,
झंकृत होकर ही निकली |
यूँ ही चुप-चाप ,क्यूँ बैठे हो |
हाथ धरे क्योँ बैठे हो |

my poetry: नासमझी
my poetry: नासमझी: समझ न सकोगी , कभी तुम मुझे | मुझे इसकी परवाह थी भी नहीं | पर आस एक जरूर थी ; रोवोगी , दिल से मई...
Tuesday, October 25, 2011
my poetry: क्रांति
my poetry: क्रांति: मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है | थोड़ा सोचा , फिर बोला ; खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या ! मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा | उसने बिन...
क्रांति

मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है |
थोड़ा सोचा , फिर बोला ;
खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या !
मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा |
उसने बिना सोचे बोला ,
तूफ़ान के बाद बर्बादी देखे हो क्या !
तो मैंने पूछा , बर्बादी से क्या मिलेगा |
उसने हँसकर बोला ,
जापान-जर्मनी देखे हो क्या !
अब पलटकर उसने पूछा ,
कभी भूखे बच्चे को रोते देखे हो |
कभी शेर-सवार गदहे को देखे हो |
मै सोचा , बहुत सोचा , फिर बोला ;
शायद , यही तो यहाँ होता है |
मैंने पूछा लोकतंत्र क्या है ???
उसने गंभीर होके बोला ,
कभी सियारों कि हुँकार और गदहों कि दहाड़ सुनी है क्या !!
my poetry: उफनता-तूफ़ान
my poetry: उफनता-तूफ़ान: आज दिल के समंदर मे, खुल के तूफ़ान आया है | रोक सको तो रोक लो | आज इन बह ती फिजाओं मे भी एक जोश आया है | रोक सको तो रोक लो| आज इन घूम...
Subscribe to:
Comments (Atom)

