Popular Posts

Tuesday, October 25, 2011

my poetry: क्रांति

my poetry: क्रांति: मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है | थोड़ा सोचा , फिर बोला ; खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या ! मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा | उसने बिन...

क्रांति







मैंने पूछा क्रांति कैसे आती है |
थोड़ा सोचा , फिर बोला ;
खामोशी के बाद तूफ़ान देखे हो क्या !

मैंने पूछा उसके बाद क्या होगा |
उसने बिना सोचे बोला ,
तूफ़ान के बाद बर्बादी देखे हो क्या !

तो मैंने पूछा , बर्बादी से क्या मिलेगा |
उसने हँसकर बोला ,
जापान-जर्मनी देखे हो क्या !


अब पलटकर उसने पूछा ,
कभी भूखे बच्चे को रोते देखे हो |
कभी शेर-सवार गदहे को देखे हो |
कभी रंगे सियार को माला जपते देखे हो |
मै सोचा , बहुत सोचा  , फिर बोला  ;  
शायद  , यही तो यहाँ होता है |




मैंने पूछा लोकतंत्र क्या है ???
उसने गंभीर होके बोला ,
कभी सियारों कि हुँकार  और  गदहों कि दहाड़ सुनी है क्या !!


................................................SRT…………………………………………………………………………………………………………………

my poetry: उफनता-तूफ़ान

my poetry: उफनता-तूफ़ान: आज दिल के समंदर मे, खुल के तूफ़ान आया है | रोक सको तो रोक लो | आज इन बह ती फिजाओं मे भी एक जोश आया है | रोक सको तो रोक लो| आज इन घूम...

उफनता-तूफ़ान




आज दिल के समंदर मे, खुल के तूफ़ान आया है |
रोक सको तो रोक लो |



आज इन बहती फिजाओं मे भी एक जोश आया है |
रोक सको तो रोक लो|

आज इन घूमते-मंडराते बादलों से भी एक संवाद आया है |
सोच सको तो सोच लो | 
 
धर्म कि आड़ मे कब तक , नफरत हिंसा फैलाओगे |
उफनते-तपते गुस्से से आज बच सको तो बच लो |

मेरे मुल्क कि वादियों को कब तक जलाओगे ,
खामोशी मे भी एक जवाब आया है |
वक़्त है  , सोच लो और भाग सको तो भाग लो , .नहीं तो ख़ाक मे मिल जाओगे ||

Monday, October 24, 2011

my poetry: भारतीय-सेना को समर्पित (Dedicated to indian army--...

my poetry: भारतीय-सेना को समर्पित (Dedicated to indian army--...: जब सारी दुनिया सोती है , हम चैन से देखो जगते हैं | जब बारिष होती रहती है , हम उसमे भी ...

भारतीय-सेना को समर्पित (Dedicated to indian army---)


जब सारी दुनिया सोती है ,
                         हम चैन से देखो जगते हैं |
जब बारिष होती रहती है ,
                        हम उसमे भी सो लेते हैं |  

जब आँख से आंसू आते हैं ,
                        हम उसमे भी हंस लेते हैं |
जब सारी दुनिया सोती है ,
                     हम चैन से देखो जगते हैं |


जब दुश्मन आगे होता है ,
                      सर धड़ से अलग कर देते हैं |
जब जंग-ए-मैदान थर्राता है ,
                       हम कफ़न बाँध चल देते हैं |

जब सारी दुनिया सोती है ,
                      हम चैन से देखो जगते हैं ||
 
***********************************************************************************************